Saturday, December 18, 2010

ज्ञान की देवी

संगमरमरी बाहे उसकी

तन फूलो की ड़ाल !

नैन उसके जादू भरे

मुख चाँदी की थाल !

कुंदन जैसे ओंठ रसिले

रेशम जैसे बाल !

चंदा-सूरज छुप जाय

देख क़े गोरे गाल !

उसके दर्प की माया से

आँखे है लालो-लाल !

बहती नदिया को शर्माए

मस्त पवन की चाल !

सुंदर सुंदर गीत मिलन क़े

मधुर -मधुर सुरताल !

वसंत पग पग नाचे

मौसम खेले हाल !

वह मेरे ज्ञान की देवी

मै उसका महिपाल !

4 comments:

  1. इस नए और सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  2. नववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  3. waah! bahut khub... behtreem likha aap ne bdhaai...

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