Monday, December 13, 2010

अनकहनी...!

पियूष उघडे हुए माता

दूध पिलाती जाती है .....

लेकिन

किस आशा पर ;

यही, न कि

बेटा अंतिम समय

अवश्य पिलाएगा

दो बूँद

पानी क़े......!!

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